То кӣ хумори меҳнати он симбри кашам
چند از هوس آن لب چون قند بسوزم
ӯ мехӯрд бамурдам ва ман дардисари кашам
گر سوختنی هم شده ام چند بسوزم
Дарди марои бғир чаҳ нисбат ки муддаӣ
مگذار که از تلخی آن گریه جانسوز
Хор аз қадам бар орад ва ман аз ҷигари кашам
در حسرت آن لعل شکر خند بسوزم
Зоҳир шавад харобии олами зи сайли ашк
دل نامزد عشق کسان ساخته جانرا
Рӯзӣ ки ман гилӣми худ аз об баркашам
در آتش تو بهر زبان بند بسوزم
Ман масти худ муродаму носеҳи марои з май
دور از تو همان به که جنونم برد از هوش
Чндонкаҳи манъ беш кунад бештари кашам
ورنه چو شوم بی تو خردمند بسوزم
Гар нӯшам аз суфоли сегон ту дарде
اهلی دهدم پند که کم سوز ز مهرش
Беҳтари зи оби Хизр ки аз ҷоми зркшм
ترسم که اگر سوزم ازین پند بسوزم