Тарки хубон гарчи аз даст маломат мекунем
چند این دل سودازده را پند بگویم
Чун биҳиштӣ сӯратӣ дидам қиёмат мекунам
دیوانه شدم بیهده تا چند بگویم
Зикри дил гар мекунам бар ман гумон дил мабар
سوگند دهندم که کنم ترک تو ای بت
Ман ҳадисӣ бо ту аз рӯз саломат мекунам
کفرست که ترک تو بسوگند بگویم
Мекунам арзи ниёзигар сагатро ҷони даҳум
درد دل دیوانه بدیوانه توان گفت
То напиндорӣ ки изҳор каромат мекунам
سودی ندهد گر بخردمند بگویم
Мастаму девонау ҳасани парии пеши назар
هرگز نرود از دل من تلخی حسرت
Лоҷарами худро брсўоиӣ аломат мекунам
هر چند کزان لعل شکر خند بگویم
Саҷда бут кардам ва оташ задам дар хонқаҳ
شیرین نشود جز بگزیدن لبم از قند
Кофарамгар ҳеҷ парво аз надомат мекунам
تا کی بزبان من سخن قند بگویم
Ғарқаи баҳри ғамам аз изтиробам чора нест
هرگز که غم بنده خورد؟ به ز خداوند
Ман на бисбрии зи роҳ истиқомат мекунам
آن به که غم خود بخداوند بگویم
Гарчи дарвешам чу аҳлӣ ҳимматӣ дорам баланд
اهلی لب او کی دلم از بند گشاید
Зон сабаби майл батон сарв қомат мекунам
هرچند که صد نکته دلبند بگویم