Дар дилам аз ту гиреҳ ба ки кушод аз дгарон

می‌میرم و خار غمت از جان نمی‌آید برون

НоМуродии зи ту хуштар ки мурод аз дгарон

خاری که ره در جان کند آسان نمی‌آید برون

Гар бтолъи зи ҳарифони ту икзраҳ камем

وه‌وه چه نازک می‌دمد گر در رخت خط سیه

Шукри эзад ки ба меҳрем зи ёд аз дгарон

بر گرد گل زین خوب‌تر ریحان نمی‌آید برون

Хубрӯёни ҳама дар ҷилва ҳасананд вале

من کشته آن کز تنم تیر تو ره در دل کند

Кӣ шавад ошиқи ғамгини ту шод аз дгарон

یاران به غم کز سینه‌ام پیکان نمی‌آید برون

Ту маро мекашӣ аз ҷаври фалак чун нолам

عیبم مکن کز سوز دل روشن ز چاک سینه‌ام

Натавон зад бҷФоҳоӣ ту дод аз дгарон

آتش چو سر زد شعله‌اش پنهان نمی‌آید برون

Аз тугар сар кашад аичшмаҳи ҳайвони аҳлӣ

جان سوخت اهلی را ز غم دلسوز از آن شد ناله‌اش

Ташна лаб мерад ва сероб мабод аз дгарон

در دل نگیرد هر نفس کز جان نمی‌آید برون