Пояи миъроҷи ҷони хоҳии зи дунёи даргузар

توبه کردم از می و معشوق سرمستم دگر

Пой дар ҳафтуми фалак нау змсиҳои даргузар

توبه یی هرگز نکردم من که نشکستم دگر

Дӯш дар маҷлис чаҳ хуш мегуфт бо парвонаи шамъ

ذره خاکم ولی تا جذبه مهرم رسید

Гар сари мурдани надорӣ аз сари мо даргузар

آنچنان برخاستم بیخود که ننشستم دگر

То набарди ғайрати Юсуфи турои ангушти айб

دادم از دست آن دو زلف و رشته جانم گسست

Бозгири ангушт ва аз айби Зулайхои даргузар

آه اگر افتد سر زلف تو در دستم دگر

Мурдани андари ҳиҷр хуш бошад на дар рӯзи висол

یک دو روزی غصه دنیا دلم در بند داشت

эй аҷал кораст моро бо ту аз мо даргузар

شکر ساقی میکنم کز غصه وارستم دگر

эй шаби ҳиҷрони магари рӯз қиёмат бигузарӣ

بخت اگر یاری کند اهلی گلی خواهد شکفت

Сӯхтам аз зулмати охир ё бикаш ё даргузар

غنچه دل را که در شاخ گلی بستم دگر