Соим буд онкии хотирӣ шод кунад

صایم بود آنکه خاطری شاد کند

Неи онкии зи рӯзаи сарфа зод кунад

نی آنکه ز روزه صرفه زاد کند

Нони даҳ ки аз он фариза шуд рӯзаи бхлқ

نان ده که از آن فریضه شد روزه بخلق

То сайри ҳам аз гуруснагон ёд кунад

تا سیر هم از گرسنگان یاد کند