Ман ки бошам ки таманнои висол ту кунам

من که باشم که تمنای وصال تو کنم

ё кӣм то ки ҳадиси лабу хол ту кунам

یا کیم تا که حدیث لب و خال تو کنم

Кас ба даргоҳи хаёл ту намеёбад роҳ

کس به درگاه خیال تو نمی‌یابد راه

Ман чаҳ беҳудаи таманнои висол ту кунам

من چه بیهوده تمنای وصال تو کنم

Гилаи ишқи ту дар пеш ту натавонам кард

گلهٔ عشق تو در پیش تو نتوانم کرد

Сокитам то ки шабии пеши хаёл ту кунам

ساکتم تا که شبی پیش خیال تو کنم

Аз сари мардумегар ту кулоҳӣ наҳем

از سر مردمیی گر تو کلاهی نهیم

Мардуми чашму серуми тарафи дўол ту кунам

مردم چشم و سرم طرف دوال تو کنم

Вар ба чашми ту даройади суханам то бузем

ور به چشم تو درآید سخنم تا بزیم

Дар ғазалҳо сифати чашми ғизол ту кунам

در غزلها صفت چشم غزال تو کنم

Шеъри ман саҳар шуд ва шуд ба камол аз паии он

شعر من سحر شد و شد به کمال از پی آن

Ки ҳамеи васфи ҷамолат ба камол ту кунам

که همی وصف جمالت به کمال تو کنم

Чашми ту саҳар ҳалоласт ва ҳаромаст маро

چشم تو سحر حلالست و حرامست مرا

Шоирӣ ҳарчӣ на бар саҳари ҳалол ту кунам

شاعری هرچه نه بر سحر حلال تو کنم