Дар дил аз шамъи Рахши анҷуманӣ сохта анд
گر آسمان دو سه روزی بمدعا گردد
Бегулу сунбулу насрини чаманӣ сохта анд
بود که گوشه چشمی بسوی ما گردد
Аз карони азалӣ то ба карони абадӣ
نشستهام برهت روز و شب بامیدی
Дарҷ дар кисвати як перҳанӣ сохта анд
که خاک راه توام بلکه توتیا گردد
Ваа чаҳ ақди алнзрии неи не сролср аст
اگر تو زهر چشانی مرا بود تریاق
Ҷуз яке нест чисони мо ва манӣ сохта анд
وگر تو درد رسانی مرا دوا گردد
Шуд таҷаллии ҷалолии сабаби мазҳари қаҳр
ز غنچه لبش ار عقده دلم نگشاد
Ин дўбинони з чаҳ рӯи аҳриманӣ сохта анд
کیم نسیم بهاری گره گشاه گردد
Малики ҳасан ба дили баст бар авранги ҷалол
همین نه بلبل دستانسرایت اسرار است
Бингар аҳриманони мо ва манӣ сохта анд
که بر سراغ تو در هر چمن صبا گردد