Кӯи дил ки балои рӯзгор ту кашад

کو دل که بلای روزگارِ تو کشد

Кӯи ҷон ки уқубати шумор ту кашад

کو جان که عقوبتِ شمارِ تو کشد

Ман нанги занони мстҳозаҳи шдҳом

من ننگِ زنان مستحاضه شدهام

Кӯи гардани амрдон ки бор ту кашад

کو گردنِ امردان که بارِ تو کشد