Дардо ки дилами воқифи он роз нашуд
دردا که دلم واقف آن راز نشد
Ҷон низ дамии муҳаррам дмсоз нашуд
جان نیز دمی محرمِ دمساز نشد
Чаҳ ғусса буд варои он дар ду ҷаҳон
چه غصّه بود ورای آن در دو جهان
Кин чашми фарози гашт ва он боз нашуд
کاین چشم فراز گشت و آن باز نشد