Гули байн ки бар атрофи чамани минозд

گل بین که بر اطراف چمن مینازد

Вази сӯй дигар сарву самани минозд

وز سوی دگر سرو و سمن مینازد

Ҳар гул ки ба ноз боз хандид чу субҳ

هر گل که به ناز باز خندید چو صبح

Аз ҳасани ту ё зи шеъри ман минозд

از حسن تو یا ز شعرِ من مینازد