Он май ки дилаш ба сад таманно ме хӯрд
آن می که دلش به صد تمنا میخورد
Дар майкадаи неи соф аз он монад на дард
در میکده نی صاف از آن ماند نه درد
Он ҳасан ки дили зи дасти маҷнӯн май барад
آن حسن که دل ز دست مجنون میبرد
Савганд ба ҷони ғам ки бо маҷнӯни мард
سوگند به جان غم که با مجنون مرد