Имшаб ки завқи ҷилваи Рахш бениқоб дошт
چه ز نظّاره برد دیده که حیرانش نیست؟
Бар рухи ҳазор парда ба ранг ҳиҷоб дошт
به چه دل جمع کند آنکه پریشانش نیست؟
Дар даст дошт баҳри тамошои ҳасани хеш
حیرت صورت دیوار چنین میگوید
Ойӣнае ки ҳавсила офтоб дошт
که درین خانه کسی نیست که حیرانش نیست
Ойӣна шуд зъкси Рахши офтоби пӯш
دست امیّد من و بخت رسایی هیهات
Бо онкии рух ҳануз дарун ниқоб дошт
این غباریست که بر گوشة دامانش نیست
Хуршед дар шиканҷаи тоб аз рухи ту буд
نفس نغمه طرازم به خیال رخ دوست
Рӯзӣ ки илтифоти ту бо мо итоб дошт
عندلیبیست که پروای گلستانش نیست
Ҳар матлаъи баланд ки мехонд офтоб
به چه امید نهم دل که درین گوشة چشم
Рӯй ту дар бдиҳаҳи ҳазораш ҷавоб дошт
نگهی نیست که صد بار نگهبانش نیست
Имшаб ки ршиноси асар буд оҳи мо
شوخی طبع مرا هست بهاری که در او
Бедор буд бахт вале дида хоб дошт
بلبلی نیست که صد غنچه غزلخوانش نیست