Ҳам бахти номусоиди ҳам зулфи ёри боис
سفر عمر زیانست و درو سود عبث
Ин тираи рӯзӣ мо дорад ҳазор боис
حسرت بود چو اندیشة نابود عبث
Дар даҳри номусоиди роҳат чаҳ гӯнаи байнам
کس درین مرحله یارب به چه خرسند شود؟
На осмони мувофиқ , на рӯзгори боис
فکر معدوم عبث حسرت موجود عبث
Каси ғам чаҳ сон набинад , каси шод чун нишинад ?
دل ازین دانش بیجا به مرادی نرسید
Инро ҳазор монеъ , онро ҳазор боис
هر چه گفتیم و شنیدیم عبث بود عبث
Дар тарк матлаб омад осӯдаи дили нишастан
عمر طی گشت و به جایی نرسیدیم آخر
Бематлабӣ нахоҳад дар ҳеҷ кори боис
قدم سعی درین بادیه فرسود عبث
Ҳар ҷо ки корфармо ишқасту ишқи содиқ
طول عمر تو اگر عرض ندارد چه هنر
Беқадар шуд мрҷҳ бе эътибори боис
تار در جامه بود بیمدد پود عبث
Моро ба боздидии ннўохтӣ ва гардид
پا ازین مرحله دانسته کشد مرد خدا
Ҳам мунфаили тамошои ҳам шармсори боис
قدم معرفت این راه نپیمود عبث
Дар ваъдаи ту файёзгар чашми бохти лекин
کاش در راه عدم همرهی پا میکرد
Касро гунаҳ набошад шуд интизори боис
سر که فیّاض به پای همهکس سود عبث