Ҳарфи ъқборо дили огоҳам аз дунё шунид

آن شوخ که بی‌خواب و خمارش نتوان دید

Аз лаби имрӯзи гӯшами нағма фардо шунид

در خواب به آغوش و کنارش نتوان دید

Ху ба танҳоӣ чунон кардам ки дар шабҳои ғам

ای خضر ترا چشمة حیوان، که مرا هست

наме тавон аз ошёнами нола анқо шунид

دریای سرابی که کنارش نتوان دید

Чашми пари ҳарфи ту имшаб гуфт дар гӯши дилам

خونگرمی گل می‌کشدم سوی چمن لیک

Ҳар чаҳ хоҳад аз лаби хомӯши ман фардо шунид

نشتر به جگر ریزی خارش نتوان دید

Гар ба ёди нолаи орми олимӣ пар ме шавад

ساغر همه چیزش خوش و زیباست ولیکن

Ончии гӯши ношинав зон лаъл ногуё шунид

این هست که لب بر لب یارش نتوان دید

Посбон шуд музтариби имшаб чу дар зиндони ғам

در غنچه نهانست گلم با که توان گفت!

Нолаи занҷири ман аз доман саҳро шунид

دارم چمنی، لیک بهارش نتوان دید

Ошно бо ҳарф ошиқ нест ғайр аз гӯши ёр

در وادی امیّد به خضری نرسیدیم

Дарди дил дар пеш мардум кардам ӯ танҳо шунид

این بادیه جز گردِ سوارش نتوان دید

Рамзи ишқу ошиқии файёзи ҷуз бо кас нагуфт

فیّاض بشو چهرة دل از همه امیّد

Дар ҷаҳон ҳар каси сурӯди ин нағмаро аз мо шунид

این آینه در زنگ غبارش نتوان دید