Асари надидаи дил аз ҳарфи меҳрбонии ту

در خواب خمار آن چشم دایم ز شراب او

Чу шамъ то ба кӣ ин гармии забонии ту

چشم همه شب تا روز بیدار ز خواب او

Касе чаҳ гӯна кунад забти худ ки дилҳо ро

تیغ تو و ما هر دو از تشنه لبی مردیم

Ба ошкори баради ғамза наоне ту

او تشنه به خون ما، ما تشنه به آب او

Ту гарми узри ситами гаштӣу маро ба лаб

از ساغر وصل او لب تر نتوان کردن

Шикоят об шуд аз шарми ҳамзабонии ту

اندیشه به چرخ افتد از بوی شراب او

Ҳануз тифлӣу донишварони олам ро

در بزم جگرخواری جرأت نتوان کردن

Забони нуктаи фурӯи басти нуктаи донеи ту

خمیازه نفس دزدد از بوی کباب او

Ба хати сабз назар ронадӣ он қадари файёз

اندیشه نرنجانی از تربیتم فیّاض

Ки гашт бар ҳамаи равшани саводи хуонеи ту

ممکن نبود هرگز تعمیر خراب او