Зулфи ту шабаст ва рӯй ту рӯз

زلف تو شب است و روی تو روز

Васли ту чу рӯзгори наврӯз

وصل تو چو روزگار نوروز

Бар васли ту « кас » нашуд Музаффар

بر وصل تو «کس» نشد مظفر

Бар давлат кас нагашт пирӯз

بر دولت کس نگشت پیروز

Гаштаст дилам чу Кебеки ҷонбоз

گشتست دلم چو کبک جانباز

Зулфин ту ҳамчуи бози кин туз

زلفین تو همچو باز کین توز

Бо зулф магӯ ки сайд дил кун

با زلف مگو که صید دل کن

Саққои бачаро шино ме омӯз

سقا بچه را شنا می آموز

Кардӣ дили бандаи тирборон

کردی دل بنده تیرباران

Зон чашми камони каши ҷҳонсўз

زان چشم کمان کش جهانسوز

То чанд зании зи чашми охир

تا چند زنی ز چشم آخر

Бар ҷони бараҳнаи тири дили дуз

بر جان برهنه تیر دل دوز

эй меҳри гусастаи дӯшу рафта

ای مهر گسسته دوش و رفته

Биншину биё ва кин менадуз

بنشین و بیا و کین میندوز

То чашми ситораи бори дӯшин

تا چشم ستاره بار دوشین

Хўршидпрст бошад имрӯз

خورشیدپرست باشد امروز

Модар ба хуҷастаи рӯз зод аст

مادر به خجسته روز زاد است

Он рӯй чу хуршеди дили афрӯз

آن روی چو خورشید دل افروز

Гўӣӣ ки кадоми рӯз буд аст

گوئی که کدام روز بود است

Он рӯз ки офарин бидон рӯз

آن روز که آفرین بدان روز

Дайраст ки « то » дили қавомӣ

دیر است که «تا» دل قوامی

Аз зулф ту сохтаст ҷони бўз

از زلف تو ساختست جان بوز