Имшаб ки расед дӯст дар манзили ман
امشب که رسید دوست در منزل من
Шуд ҷону дил аз ҳузураши обу гули ман
شد جان و دل از حضورش آب و گل من
Ойӣна дил ёфт сафо аз рӯйиш
آیینه دل یافت صفا از رویش
эй субҳ макун тираи сафои дили ман
ای صبح مکن تیره صفای دل من