Шабҳо ки доғи фурқати он моҳ май кашам
شبها که داغ فرقت آن ماه می کشم
То рӯз нола мекунаму оҳ май кашам
تا روز ناله می کنم و آه می کشم
Зон ма намекунам гилаи кини меҳнату бало
زان مه نمی کنم گله کین محنت و بلا
Аз бахти тирау дили гумроҳ май кашам
از بخت تیره و دل گمراه می کشم
Шабҳои хешро ки зи зулфаш сиёҳ шуд
شبهای خویش را که ز زلفش سیاه شد
Аз рӯйиши интизори саҳаргоҳ май кашам
از رویش انتظار سحرگاه می کشم
То тоҷ шуд ба фарқи серуми гирди доманаш
تا تاج شد به فرق سرم گرد دامنش
Домани зи тахту манзалату ҷоҳ май кашам
دامن ز تخت و منزلت و جاه می کشم
Ҷон май барам ба тӯҳфаи гадоёни дӯст ро
جان می برم به تحفه گدایان دوست را
Нақди ҳақир дар назари шоҳ май кашам
نقد حقیر در نظر شاه می کشم
Аз ошиқии насиби ман ин шуд ки рӯзу шаб
از عاشقی نصیب من این شد که روز و شب
Ҷаври рақибу таънаи бадхоҳ май кашам
جور رقیب و طعنه بدخواه می کشم
Ҷомӣ чу коҳ шуд танам аз заъф ва ман ҳануз
جامی چو کاه شد تنم از ضعف و من هنوز
Кӯҳи ғамаш ба қӯти ин коҳ май кашам
کوه غمش به قوت این کاه می کشم