Шунидам ки махдуми аҳли ҳунар
شنیدم که مخدوم اهل هنر
Ба самъи ризои шеъри ман гӯш кард
به سمع رضا شعر من گوش کرد
Ба завқии тамоми он шароби гарон
به ذوقی تمام آن شراب گران
Ки ман дода будам сабк нӯш кард
که من داده بودم سبکنوش کرد
Чу сармаст шуд фикри таш зон шароб
چو سرمست شد فکرتش زان شراب
Ки ҷонро ба як ҷуръа биҳуш кард
که جان را به یک جرعه بیهوش کرد
Бишуд бо арӯсони афкори ман
بشد با عروسانِ افکار من
Ду дасти қабули андар оғӯш кард
دو دست قبول اندر آغوش کرد
Валикин чу кобӣнашон хост кард
ولیکن چو کابینشان خواست کرد
Ба иқболи ман худ фаромӯш кард
به اقبال من خود فراموش کرد
зи бахшиш ҳаме ронад калакаши сухан
ز بخشش همی راند کلکش سخن
Надонам мар ӯро ки хомӯш кард
ندانم مر او را که خاموش کرد