Моҳӣ ки бсолӣ накунад аз мо ёд

ماهی که بسالی نکند از ما یاد

Рӯзии ман длсўхтаҳро дод надод

روزی من دلسوخته را داد نداد

Зондст ки он сарви з мо озодаст

زاندست که آن سرو ز ما آزادست

Аз сарви қадаши куҷои тавон буд озод

از سرو قدش کجا توان بود آزاد