Роз маъшӯқ ҳадисӣаст ниҳони доштанӣ

راز معشوق حدیثیست نهان‌داشتنی

эй сабои пеши кас аз қиссаи мо дам назанӣ

ای صبا پیش کس از قصه ما دم نزنی

Шамъ мехост ки ронад сухани роз

شمع میخواست که راند سخن راز

Нек будаш ки бар омад ба забон сӯхтанӣ

نیک بودش که بر آمد به زبان سوختنی

Хилвати рози воъзои наъраи мастонаи куҷо ва ту куҷо

خلوت راز واعظا نعرهٔ مستانه کجا و تو کجا

Ошиқӣ ношуда гармӣ макун эй ношуданӣ

عاشقی ناشده گرمی مکن ای ناشدنی

Шишаи ринди тавон зери қадами зӯри шикаст

شیشه رند توان زیر قدم زور شکست

Қадам он бошаду мардӣ ки хумораши шиканӣ

قدم آن باشد و مردی که خمارش شکنی

Перҳангар танат озурд чаҳ пӯшии он ро

پیرهن گر تنت آزرد چه پوشی آن را

Айб Юсуф натавон кард ба нозуки баданӣ

عیب یوسف نتوان کرد به نازک‌بدنی

Ғунчаи пеши даҳанати лаб ба ҳадисӣ нагушӯд

غنچه پیش دهنت لب به حدیثی نگشود

Расм хиҷлат задагонаст балӣ кам суханӣ

رسم خجلت‌زدگان است بلی کم‌سخنی

Гуфта будӣ сарат аз теғ Раҳонем камол

گفته بودی سرت از تیغ رهانیم کمال

Зиндаи гирдами зи сари ин ваъда чу дарё накунӣ

زنده گردم ز سر این وعده چو دریا نکنی