Гуфт Фарҳоди оқо ба мейр вале
گفت فرهاد آقا به میر ولی
Ки рашидӣаро кунем обод
که رشیدیه را کنیم آباد
Зар ба табризёни боҷру санг
زر به تبریزیان بآجر و سنگ
Бидиҳем аз барои ин бунёд
بدهیم از برای این بنیاد
Буд мискин ба шуғл кӯҳ кунӣ
بود مسکین به شغل کوه کنی
Ки аз мӯрони кӯҳу дашти зиёд
که از موران کوه و دشت زیاد
Лашгари подшоҳи тўқтмш
لشگر پادشاه توقتمش
Омаду ҳотифи ин Нидо дар дод
آمد و هاتف این ندا در داد
Лаъли ширини бком хусрав шуд
لعل شیرین بکام خسرو شد
Кӯҳ беҳуда мекунад Фарҳод
کوه بیهوده میکند فرهاد