Рафтӣ ба ҷангу ҷузи ту ки дид эй санами санам
رفتی به جنگ و جز تو که دید ای صنم صنم
Кӯ бо ҳазор марди муборизаи фара буд
کو با هزار مرد مبارزه فره بود
Боз омадӣ Музаффару пирӯзу рӯзи нав
باز آمدی مظفر و پیروز و روز نو
Оре чу ту санами ҳамаи ҷои рӯз ба буд
آری چو تو صنم همه جا روز به بود
Лобуд Музаффар ояд он кас ки гоҳи ҷанг
لابد مظفر آید آن کس که گاه جنگ
Аз ғамзагону зулфаши тиру зира буд
از غمزگان و زلفش تیر و زره بود