То наёяд ба миёни ҳарфи ниҳони ман ва ту
تا نیاید به میان حرف نهان من و تو
Ғайр дар базм нишинад ба миёни ман ва ту
غیر در بزم نشیند به میان من و تو
Ту ниёеи зи ҳаё дар сухан ва ман зи ҳиҷоб
تو نیایی ز حیا در سخن و من ز حجاب
То чаҳ созанди рақибони зи забони ман ва ту
تا چه سازند رقیبان ز زبان من و تو
Чун азин рашк насузам , ки шунидам зи рақиб
چون ازین رشک نسوزم، که شنیدم ز رقیب
Гуфт вгўиӣ ки гузаштаи сети миёни ман ва ту
گفتوگویی که گذشتهست میان من و تو
Сӯзам аз рашки рақибони ту бо онкии зи давр
سوزم از رشک رقیبان تو با آنکه ز دور
намешаванд аз сари ҳасрати нигарони ман ва ту
میشوند از سر حسرت نگران من و تو
Аз табассуми дил қосид нарибоӣ зинҳор
از تبسم دل قاصد نربایی زنهار
Кофтад аз пардаи бурун , рози ниҳони ман ва ту
کافتد از پرده برون، راز نهان من و تو
Майлии оради хабари ёр ба мо эй дили зор
میلی آرد خبر یار به ما ای دل زار
То ба ин ҳила кунад рафъи гумони ман ва ту
تا به این حیله کند رفع گمان من و تو