Лаъли ту дар шикасти ман замзама бас наме кунад

لعل تو در شکست من زمزمه بس نمی‌کند

Он чаҳ ту дӯст мекунӣ душман кас наме кунад

آن چه تو دوست میکنی دشمن کس نمی‌کند

Аз сухани ҳарифи сӯзи он чаҳ ту оташини забон

از سخن حریف سوز آن چه تو آتشین زبان

Бо ман хаста мекунӣ шуъла ба хас наме кунад

با من خسته میکنی شعله به خس نمی‌کند

Роҳила аз дарат равон кардам ва ин дили тпон

راحله از درت روان کردم و این دل طپان

намекунад имшаб аз фиғони он чаҳ ҷарас наме кунад

می‌کند امشب از فغان آن چه جرس نمی‌کند

Аз хами зулфи баъди азин ҷо манимо ба мурғи дил

از خم زلف بعد ازین جا منما به مرغ دل

Мурғи қафаси шикан дигар майл қафас наме кунад

مرغ قفس شکن دگر میل قفس نمی‌کند

Мурғи дилӣ ки май ҷаҳди хоссаи зи доми ҳила Эй

مرغ دلی که می‌جهد خاصه ز دام حیله‌ای

Дона агар з дар буд боз ҳавас наме кунад

دانه اگر ز در بود باز هوس نمی‌کند

Муҳташам аз каманд шуд хастаи чунон ки чун тўӣӣ

محتشم از کمند شد خسته چنان که چون توئی

намеравад аз қафо ва ӯ рӯй ба пас наме кунад

می‌رود از قفا و او روی به پس نمی‌کند