Хушаст бар лаб қулзум нишаста дар Бокӯ
خوش است بر لبِ قلزم نشسته در باکو
Ба ёд рӯй ту соғар ба даст аммо кӯ
به یادِ رویِ تو ساغر به دست امّا کو
Шароби роўқу овози чангу зарби усӯл
شرابِ راوق و آوازِ چنگ و ضربِ اصول
Ман ва ту ва ду ҳариф дигар дариғо кӯ
من و تو و دو حریفِ دگر دریغا کو
Ба коми дили з фалак дод айш бустонем
به کامِ دل ز فلک داد عیش بستانیم
Ба як сабӯҳ вале маҷлисии муҳайёи кӯ
به یک صبوح ولی مجلسی مهیّا کو
Чаҳ чора кардам ва дарё намешавад мағлуб
چه چاره کردم و دریا نمی شود مغلوب
Ки дар кашам ба дамии киштӣ чу дарёи кӯ
که در کشم به دمی کشتیِ چو دریا کو
Шудам назор чу сӯзан дар интизори халос
شدم نزار چو سوزن در انتظارِ خلاص
Сиррии зи риштаи ин интизори пайдои кӯ
سری ز رشتۀ این انتظار پیدا کو
з ҳар муроди тавон баҳра барграфт ба сабр
ز هر مراد توان بهره برگرفت به صبر
Балӣ ба сабр вале хотири шикеби кӯ
بلی به صبر ولی خاطر شکیبا کو
Агар саботи қадамро ба хештани дорӣ
اگر ثباتِ قدم را به خویشتن داری
Дилӣ ба кор шавад , дил куҷост моро кӯ
دلی به کار شود، دل کجاست ما را کو
Сиёҳ шуд ҷигарами бас ки хештан дидам
سیاه شد جگرم بس که خویشتن دیدم
зи хештани бисмии охири дили мусаффои кӯ
ز خویشتن بَسَم آخر دلِ مصفّا کو
Ба нақди вақт қаноат кунам ки « ин алўқт »
به نقدِ وقت قناعت کنم که «اَین الوقت»
Гузашти дайу нзории умеди фардои кӯ
گذشت دی و نزاری امیدِ فردا کو