Кардам чаҳ аз лои рухи сӯии ало

کردم چه از لا رخ سوی الا

Дидам мубини худро дар асмо

دیدم مبین خود را در اسما

Додам чу соқии онҷоами боқӣ

دادم چو ساقی آنجام باقی

Аз пой то сргштми ҳамаи ло

از پای تا سرگشتم همه لا

Нои исму расмӣ на вазъу шаклӣ

نا اسم و رسمی نه وضع و شکلی

ӣнҷо яке шуд исму мсмо

اینجا یکی شد اسم و مسما

Чун ту алифи сони гардии ҷарида

چون تو الف سان گردی جریده

Гардад аёнати иктоӣии мо

گردد عیانت یکتائی ما

То ту нишинии эмин ба соҳил

تا تو نشینی ایمن به ساحل

Кӣ дар кафи ореи дарии зи дарё

کی در کف آری دری ز دریا

Худро зи соҳил дар баҳри афкан

خود را ز ساحل در بحر افکن

Бингар дар асдоФи он дрикто

بنگر در اصداف آن دریکتا

Нур алӣ шуд дар дил чаҳ тобон

نور علی شد در دل چه تابان

Аз тӯҳмати тан дил шуд мусаффо

از تهمت تن دل شد مصفا