Гар дар раҳи дӯст пойдор ояд дил
گر در ره دوست پایدار آید دل
Бар мураккаби мақсӯд савор ояд дил
بر مرکب مقصود سوار آید دل
Гар дил набӯд куҷо ватан созад ишқ
گر دل نبود کجا وطن سازد عشق
Вар ишқ набошад ба чаҳ кор ояд дил
ور عشق نباشد به چه کار آید دل
Гар дар раҳи дӯст пойдор ояд дил
گر در ره دوست پایدار آید دل
Бар мураккаби мақсӯд савор ояд дил
بر مرکب مقصود سوار آید دل
Гар дил набӯд куҷо ватан созад ишқ
گر دل نبود کجا وطن سازد عشق
Вар ишқ набошад ба чаҳ кор ояд дил
ور عشق نباشد به چه کار آید دل