Кӣ ҷузи ту дар дили ман дилдор дигар ояд

دلم به وصل تو روزی که شادمان باشد

Берун наме рӯй ту то дайгарии даройад

به روزگار مرا روز خوش همان باشد

Бо ман магӯ ки бигзор аз дасти домани ёр

به خاک پای تو جانا قسم که در پایت

Ин кор нест корӣ каз даст ман барояд

کنم نثار گرم صد هزار جان باشد

Аз сунъ калак ояд баси нақши нек аммо

دل من از غم تو تا به کی بود غمگین

Мушкили зи нақши рӯяти нақш накӯтар ояд

دل رقیب ز تو چند شادمان باشد

Ҳар ҷо ки ҳур ва тӯбо гӯйанд пеши чашмам

روا مدار ازین بیش و بیش ازین مپسند

Қадат шавад муҷассам , рӯят мусаввир ояд

که عاشق از تو چنین، بلهوس چنان باشد

Гирди сари хаёлати гирдам ки дар дили ман

گلی چو آن گل عارض مهی چو آن مه رخ

Сад бор беш ояд он дам ки камтар ояд

نه بر زمین بود و نه بر آسمان باشد

Гуфтам ба бар кӣ ое эй рашки сарву ма , гуфт

بود چو دشمن یاران، رفیق یار آن به

Кӣ сарв оварад бар , кӣ моҳ дарбар ояд

که یار من نبود یار دیگران باشد