эй соҳибӣ ки соҳиби девони чарх ро
ای صاحبی که صاحب دیوان چرخ را
Дар маҷлиси ту мансаб боло наме расад
در مجلس تو منصب بالا نمیرسد
Онҷо ки котибони ту таҳрир ме кунанд
آنجا که کاتبان تو تحریر میکنند
Ҳукми қалам ба соҳиб ҷавзо наме расад
حکم قلم به صاحب جوزا نمیرسد
Дарё чу ҷӯш мезанад аз ҷӯади худ магар
دریا چو جوش میزند از جود خود مگر
Сяти макорими ту ба дарё наме расад
صیت مکارم تو به دریا نمیرسد
Имрӯз дар басити замин бо вуҷӯди ту
امروز در بسیط زمین با وجود تو
Ойини сарварии дгариро наме расад
آیین سروری دگری را نمیرسد
Икдм намеравад ки зи дарёии халқи ту
یکدم نمیرود که ز دریای خلق تو
Сад корвони анбар Соро наме расад
صد کاروان عنبر سارا نمیرسد
Ҷами ртбто ба ҳазрати аъло Осифӣ
جم رتبتا به حضرت اعلی آصفی
Аҳволи аҷзи банда ҳамоно наме расад
احوال عجز بنده همانا نمیرسد
Бигузашт чори ма ки з девон рӯзем
بگذشت چار مه که ز دیوان روزیم
Як ҷӯ ба ваҷҳро таб ва иҷро наме расад
یک جو به وجه را تب و اجرا نمیرسد
Зери кабӯдии фалак эҳсон намонда аст
زیر کبودی فلک احسان نمانده است
ё худ бароти ризқи з боло наме расад
یا خود برات رزق ز بالا نمیرسد
Корам расидааст ба ҷое ва он чаҳ ҷо
کارم رسیده است به جایی و آن چه جا
Ҷое ки ҳеҷ хайрам аз онҷо наме расад
جایی که هیچ خیرم از آنجا نمیرسد
зи абри қатра ба каф мо наме фитад
ز ابر قطره به کف ما نمیفتد
Ва зи боди роҳатӣ ба дил мо наме расад
و ز باد راحتی به دل ما نمیرسد
Гуфтани дурӯғ рост набошад ҳаме кунад
گفتن دروغ راست نباشد همی کند
Гуҳи гоҳи вуҷӯди мкрмт аммо наме расад
گه گاه وجود مکرمت اما نمیرسد
Бо ин низоми ҳолу манолу фироқи бол
با این نظام حال و منال و فراغ بال
Ҳеҷам ба қарзи хоҳ ва тақозо наме расад
هیچم به قرض خواه و تقاضا نمیرسد
зи анъоми оми аслии хешам мадад фирист
ز انعام عام اصلی خویشم مدد فرست
зи эҳсони дайгарӣ на ки Аслан наме расад
ز احسان دیگری نه که اصلا نمیرسد
Доъӣ пиёдаасту гарони бори нотавон
داعی پیاده است و گران بار ناتوان
Ҳар рӯзи азин ба маҷлис аъло наме расад
هر روز ازین به مجلس اعلا نمیرسد
Сяти ту аз срӣ ба сурайёи расидаи бод
صیت تو از ثری به ثریا رسیده باد
Пайваста то срӣ ба сурайё наме расад
پیوسته تا ثری به ثریا نمیرسد