Ҷунуни донистаи густох тамошо мекунад мо ро

جنون دانسته گستاخ تماشا می‌کند ما را

Ки медонад ҳиҷоби ишқ расво мекунад мо ро

که می‌داند حجاب عشق رسوا می‌کند ما را

Ба завқ бехудӣ бо буии гули барг сафар дорем

به ذوق بی‌خودی با بوی گل برگ سفر داریم

Наёядгар баҳор аз пай ки пайдо мекунад мо ро

نیاید گر بهار از پی که پیدا می‌کند ما را

Агар дили зери бор ғам набошад бим расвоӣ аст

اگر دل زیر بار غم نباشد بیم رسوایی است

Сабки рӯҳии хаҷал аз кӯҳ ва саҳро мекунад мо ро

سبک‌روحی خجل از کوه و صحرا می‌کند ما را