Дишаб ба сайли ашки раҳ хоб ме задам
دیشب به سیلِ اشک رَهِ خواب میزدم
Нақшӣ ба ёди хати ту бар об ме задам
نقشی به یادِ خَطِّ تو بر آب میزدم
Абрӯии ёр дар назару хирқаи сӯхта
ابرویِ یار در نظر و خرقه سوخته
Ҷомӣ ба ёди гӯша миҳроб ме задам
جامی به یادِ گوشهٔ محراب میزدم
Ҳар мурғи фикр каз сари шох сухан биҷуст
هر مرغِ فکر کز سرِ شاخِ سخن بِجَست
Бозаши зи турраи ту ба мизроб ме задам
بازش ز طُرِّهٔ تو به مِضراب میزدم
Рӯйнигор дар назарам ҷилва ме намӯд
رویِ نگار در نظرم جلوه مینمود
Вази даври бӯса бар рух маҳтоб ме задам
وز دور بوسه بر رخِ مهتاب میزدم
Чашмам ба рӯй соқӣу гӯшам ба қавли чанг
چشمم به رویِ ساقی و گوشم به قولِ چنگ
Фолӣ ба чашму гӯш дар ин боб ме задам
فالی به چشم و گوش در این باب میزدم
Нақши хаёл рӯй ту то вақти субҳдам
نقشِ خیالِ رویِ تو تا وقتِ صبحدم
Бар коргоҳи дида бехоб ме задам
بر کارگاهِ دیدهٔ بیخواب میزدم
Соқӣ ба савти ин ғазалам коса ме гирифт
ساقی به صوتِ این غزلم کاسه میگرفت
намегуфтам ин сурӯд ва меноб ме задам
میگفتم این سرود و مِیِ ناب میزدم
Хуш буд вақти ҳофизу фоли муроду ком
خوش بود وقتِ حافظ و فالِ مراد و کام
Бар номи умру давлат аҳбоб ме задам
بر نامِ عمر و دولتِ احباب میزدم