Ту зи ман малули гаштӣ ки ман аз ту ноштобм
تو ز من ملول گشتی که من از تو ناشتابم
Снмо чаҳ май шитобӣ ки бикуштӣ аз шитобам
صنما چه می شتابی که بکشتی از شتابم
Ту раисӣу амӣрии даму панд кас нагирӣ
تو رئیسی و امیری دم و پند کس نگیری
Снмо чаҳ зўдсирӣ ки зи сайряти харобам
صنما چه زودسیری که ز سیریت خرابم
Чаҳ шавад агар замонии бидиҳӣ маро амоне
چه شود اگر زمانی بدهی مرا امانی
Ки на сихи сӯзад эй ҷон на таба шавад кабобам
که نه سیخ سوزد ای جان نه تبه شود کبابم
Чаҳ шавад агар бисозӣ нштобӣ ва натозӣ
چه شود اگر بسازی نشتابی و نتازی
Нашавад дилами намозӣ чу бабради ёри обам
نشود دلم نمازی چو ببرد یار آبم
Ту чаҳ ошиқи фироқӣ чаҳ малулӣ ва чаҳ оқӣ
تو چه عاشق فراقی چه ملولی و چه عاقی
зи кафи биҷузи ту соқии надиҳади тараби шаробам
ز کف بجز تو ساقی ندهد طرب شرابم
Бтпди дилам ки ногуҳ баравад ба ҳуҷраи он ма
بتپد دلم که ناگه برود به حجره آن مه
Чу ниҳон шуд офтобам ба ду дида чун саҳобам
چو نهان شد آفتابم به دو دیده چون سحابم
Ба камӣ чу зарра ҳоем ман агар кушода поем
به کمی چو ذرههایم من اگر گشاده پایم
Чаҳ кунам вафо надорад ба тулӯъи офтобам
چه کنم وفا ندارد به طلوع آفتابم
Аҷаби осмон чаҳ борад ки замин мутӣъ набӯд
عجب آسمان چه بارد که زمین مطیع نبود
Ту ҳар ончи пешами оре чаҳ кунам ки барнатобам
تو هر آنچ پیشم آری چه کنم که برنتابم
Ту чу ман агар биҷӯе ба шумори хоки ёбӣ
تو چو من اگر بجویی به شمار خاک یابی
Чу тӯй агар биҷӯем ба чароғ ҳо наёбам
چو توی اگر بجویم به چراغها نیابم
Нафасӣ вуҷӯд дорам ки туро суҷуди орм
نفسی وجود دارم که تو را سجود آرم
Ки суҷуд туаст ҷонои даъвоати мустаҷобам
که سجود توست جانا دعوات مستجابم
Ту бигуфтем ки дилро зи ҷаҳонёни Фрўшў
تو بگفتیم که دل را ز جهانیان فروشو
Дили худ чигуна шавем чу бабради ҳиҷрати обам
دل خود چگونه شویم چو ببرد هجرت آبم
Снмо чу ман кам ояд ба камӣу ҷони сипорӣ
صنما چو من کم آید به کمی و جان سپاری
Ки зи рашки дили кабобам ва ба ашк чун саҳобам
که ز رشک دل کبابم و به اشک چون سحابم
Ба саҳари тӯии сабӯҳам ба сафари тӯии футуҳам
به سحر توی صبوحم به سفر توی فتوحم
Ба бадали тӯии биҳиштам ба амали тӯии савобам
به بدل توی بهشتم به عمل توی ثوابم
Ту чу бўбки рубобӣ ба ситезаи тани здстӣ
تو چو بوبک ربابی به ستیزه تن زدستی
Ман хаста аз ситезат ба нафир чун рубобам
من خسته از ستیزت به نفیر چون ربابم
Ту на он шкрҷўобӣ ки ҷавоби ман ниёе
تو نه آن شکرجوابی که جواب من نیابی
Магар аҳмақам гирифтӣ ки сукут шуд ҷавобам
مگر احمقم گرفتی که سکوت شد جوابم