эй ки ту аз олами мо май рӯй
ای که تو از عالم ما میروی
Хуши зи замини сӯии само май рӯй
خوش ز زمین سوی سما میروی
эй қафаси ашкстаҳу ҷустаи зи банд
ای قفس اشکسته و جسته ز بند
Пар бикшодӣ ба куҷо май рӯй ?
پر بگشادی به کجا میروی؟
Сари зи кафан бар зан ва моро бигӯ
سر ز کفن بر زن و ما را بگو
Ки : « зи ватани хеш чаро май рӯй ? »
که: « ز وطن خویش چرا میروی؟ »
Неи ғалатам , орӣа буд ин ватан
نی غلطم، عاریه بود این وطن
Сӯии ватангоҳи бақо май рӯй
سوی وطنگاه بقا میروی
Чун зи қазои даъват ва фармон расед
چون ز قضا دعوت و فرمان رسید
Дар паии сарҳанги қазо май рӯй
در پی سرهنگ قضا میروی
ё ки зи ҷинот насимӣ расед
یا که ز جنات نسیمی رسید
Дар паии ризвони ризо май рӯй
در پی رضوان رضا میروی
ё зи таҷаллии ҷалоли қадим
یا ز تجلی جلال قدیم
Музтариб ва бесару по май рӯй
مضطرب و بیسر و پا میروی
ё зи шуъоъоти ҷамоли худо
یا ز شعاعات جمال خدا
Масти мулоқоти лақо май рӯй
مست ملاقات لقا میروی
ё зи бен хами ҷаҳони ҳамчуи дард
یا ز بن خم جهان همچو درد
Соф шудӣ сӯии ъло май рӯй
صاف شدی سوی علا میروی
ё ба сифотӣ ки хамӯшон кунанд
یا به صفاتی که خموشان کنند
Хомашу махфӣу хафо май рӯй
خامش و مخفی و خفا میروی