Қарори зиндагонӣ он нигораст

قرار زندگانی آن نگارست

Каз ӯ он беқарорӣ барқарораст

کز او آن بی‌قراری برقرارست

Марои савдои ту домани гирифтаи сет

مرا سودای تو دامن گرفته‌ست

Ки ин савдо на он савдоӣ пораст

که این سودا نه آن سودای پارست

Манам сӯзон дар оташҳои нави нав

منم سوزان در آتش‌های نو نو

Маро бо ёркон акнӯн чаҳ кораст

مرا با یارکان اکنون چه کارست

Ҳаме нолад дарун аз бе қарорӣ

همی‌نالد درون از بی‌قراری

Бидон монад ки он ҷон нигораст

بدان ماند که آن جان نگارست

Чу аз ёрии туро ҷон хаста гардад

چو از یاری تو را جان خسته گردد

намедонад ки андар ҷонаш хораст

نمی‌داند که اندر جانش خارست

Ту дар ҷӯӣу хорат май харошад

تو در جویی و خارت می‌خراشد

Наме доне ки хорӣ дар саро раст

نمی‌دانی که خاری در سرا رست

Гурезони шӯ аз он хор ва ба гули рӯ

گریزان شو از آن خار و به گل رو

Ки шамси аддӣн табризӣ баҳораст

که شمس الدین تبریزی بهارست

Хониш
ғзл шморҳ 347 — прӣ соткнӣ ъндлӣб