Гар сад ҳазор бори гудозӣ дар оташам

گر صد هزار بار گدازی در آتشم

Покиза тар шавам ки зари ноби биғшм

پاکیزه تر شوم که زر ناب بیغشم

Аз бодаи умеди ту махмуру ҷуръаи нӯш

از باده امید تو مخمور و جرعه نوش

Вази соғари навиди ту сармасту сархушам

وز ساغر نوید تو سرمست و سرخوشم

Гулгуни зи ашку зарди зи ғами нилӣ аз фироқ

گلگون ز اشک و زرد ز غم نیلی از فراق

Бингар яке бсФҳаҳи чеҳри мунаққашам

بنگر یکی بصفحه چهر منقشم

Гҳчўни ду чашми масти тўбимору нотавон

گهچون دو چشم مست توبیمار و ناتوان

Гоҳе чу турраи ту парешу мушаввашам

گاهی چو طره تو پریش و مشوشم

Қадам чу абрӯии ту камон шуд вале намонад

قدم چو ابروی تو کمان شد ولی نماند

Ҷузи тири оҳу нолаи хадангии бтркшм

جز تیر آه و ناله خدنگی بترکشم

Ҷонои ту шоду хўшдл ва биғм нишин ки ман

جانا تو شاد و خوشدل و بیغم نشین که من

Боанда ту шоду биёади ту дилхушам

با انده تو شاد و بیاد تو دلخوشم

Рӯем чу хомаи тору забонами бурӣдаи бод

رویم چو خامه تار و زبانم بریده باد

Гар ҳамчуи хома аз хати ҳукми ту саркашам

گر همچو خامه از خط حکم تو سرکشم

Сайри сипеҳру ҳамсарӣ меҳрам орзӯаст

سیر سپهر و همسری مهرم آرزوست

Кӣ пои банди меҳри ғизолони маҳвашам

کی پای بند مهر غزالان مهوشم

Ҳаргиз Фромшт накунам аз дуои хайр

هرگز فرامشت نکنم از دعای خیر

Ёдати бихир эй ки намӯдӣ Фромшм

یادت بخیر ای که نمودی فرامشم

Ин май ки ночшидаҳи марои маст ва хира кард

این می که ناچشیده مرا مست و خیره کرد

Ёрб чҳо равадгар аз он ҷуръае чашм

یارب چها رود گر از آن جرعه ای چشم

Гуфтам шабӣ бигӯаш амӣрии ҳадиси хеш

گفتم شبی بگوش امیری حدیث خویش

Гуфто бҳўш бош ки ман низ биҳшм

گفتا بهوش باش که من نیز بیهشم