Он мубдиъӣ ки чашмаи нутқ аз забони кушод
آن مبدعی که چشمه نطق از زبان گشاد
Қуфл дар сухан бакулед забони кушод
قفل در سخن بکلید زبان گشاد
Он подшоҳ каз караму зарраи парварӣ
آن پادشاه کز کرم و ذره پروری
Дар пеши зарраи зарра чу хуршед хон кушод
در پیش ذره ذره چو خورشید خوان گشاد
Дар боргоҳи шавкати хуршеди партаваш
در بارگاه شوکت خورشید پرتوش
Аз шарқ то ба ғарби фалаки сояи бони кушод
از شرق تا به غرب فلک سایه بان گشاد
Бар ташнагони малики адами дасти раҳматаш
بر تشنگان ملک عدم دست رحمتش
Аз хоки чашмаи чашмаи оби равони кушод
از خاک چشمه چشمه آب روان گشاد
Занҷири адли басти зи файзи шуъоъи меҳр
زنجیر عدل بست ز فیض شعاع مهر
Бар тоқи чарх то дар амну амони кушод
بر طاق چرخ تا در امن و امان گشاد
Дарҳои орзӯии муроду ҳавои нафас
درهای آرزوی مراد و هوای نفس
Бар дӯсти басту бръд ва аз имтиҳони кушод
بر دوست بست و برعد و از امتحان گشاد
Худ сайд карду сӯрати одами баҳонаи сохт
خود صید کرد و صورت آدم بهانه ساخت
Каз ғамза тир карду зи абрӯи камони кушод
کز غمزه تیر کرد و ز ابرو کمان گشاد
Дар боғи сунъ ӯ ки маҷол назора нест
در باغ صنع او که مجال نظاره نیست
Гар дар кушоди ҳам карами боғбони кушод
گر در گشاد هم کرم باغبان گشاد
Мақсӯди дӯст буд рухи оли Мустафо
مقصود دوست بود رخ آل مصطفی
Аз сад ҳазор гул ки дарин бӯстони кушод
از صد هزار گل که درین بوستان گشاد
Шоҳи араб чу майл ба фатҳ фалак намӯд
شاه عرب چو میل به فتح فلک نمود
Маро ду нима кард ва дар осмони кушод
مه را دو نیمه کرد و در آسمان گشاد
Мушкили гушои халқ ки аз илми ман лдн
مشکل گشای خلق که از علم من لدن
Ҳар мушкилӣ ки буд бшрҳу баёни кушод
هر مشکلی که بود بشرح و بیان گشاد
Аз остон ӯст кушода дар биҳишт
از آستان اوست گشاده در بهشت
Хуррам касе ки дида бар он устони кушод
خرم کسی که دیده بر آن استان گشاد
Баъд аз набии эмоми баҳақи Муртазо алӣ аст
بعد از نبی امام بحق مرتضی علی است
Ширӣ ки панҷааш дар хайбари равони кушод
شیری که پنجه اش در خیبر روان گشاد
Он Хизри раҳравон ки паии ташнагони дайн
آن خضر رهروان که پی تشنگان دین
Сад чашмаи ҳаёти зи нӯки забони кушод
صد چشمه حیات ز نوک زبان گشاد
Он Нӯҳи мкрмт ки дами зулфиқор ӯ
آن نوح مکرمت که دم ذوالفقار او
Тӯфон намӯд ду лаби хўнФшони кушод
طوفان نمود دو لب خونفشان گشاد
Ҳркўи ҳадиси талхии заҳр ҳасан шунид
هرکو حدیث تلخی زهر حسن شنید
Талхи оби ҳасрат аз мижаи хӯни чикони кушод
تلخ آب حسرت از مژه خون چکان گشاد
Баҳри ҳусайни ташнаи ҷигари ҷон хаста ам
بهر حسین تشنه جگر جان خسته ام
Сад чашмаи зи оби чашми дринхокдони кушод
صد چشمه ز آب چشم درینخاکدان گشاد
Ҳаркас ки абри дидаи зин алъобд дид
هرکس که ابر دیده زین العابد دید
Хуноби чашмаш аз мижаи сад новдони кушод
خوناب چشمش از مژه صد ناودان گشاد
Баҳри карами Муҳамади боқир ки даст ӯ
بحر کرم محمد باقر که دست او
Сад хирман дар аз камари каҳкашони кушод
صد خرمن در از کمر کهکشان گشاد
Хуршеди илми ҷаъфари содиқи казин чаман
خورشید علم جعفر صادق کزین چمن
Чун субҳи содиқ аз нафасаши гули даҳони кушод
چون صبح صادق از نفسش گل دهان گشاد
Чашмӣ ки рӯй Мӯсои козим бсдқ дид
چشمی که روی موسی کاظم بصدق دید
Ризвон биравӣ ӯ дар боғи ҷинони кушод
رضوان بروی او در باغ جنان گشاد
Султони дайну шоҳи хирсони алӣ ки заҳр
سلطان دین و شاه خرسان علی که زهر
Хӯрд аз ризо чу шаҳду дили душманони кушод
خورد از رضا چو شهد و دل دشمنان گشاد
Ганҷи шарафи Муҳамади ҷавод каз карам
گنج شرف محمد جواد کز کرم
Қуфл аз дар захоири дарёи вкони кушод
قفل از در ذخایر دریا وکان گشاد
Баҳри карами алии нақии коби зиндагӣ
بحر کرم علی نقی کآب زندگی
Бртшнгони зи чашмаи рутаби аллсони кушод
برتشنگان ز چشمه رطب اللسان گشاد
Шоҳӣ ки ёфт аз ҳасани асгарии мадад
شاهی که یافت از حسن عسگری مدد
Малики ҷаҳони бъсгри нусрати қуръони кушод
ملک جهان بعسگر نصرت قرآن گشاد
Ганҷӣ ки нақд ҳар ду ҷаҳонаст оқибат
گنجی که نقد هر دو جهان است عاقبت
Хоҳад бадасти Меҳдии охири замони кушод
خواهد بدست مهدی آخر زمان گشاد
ӯ он гиреҳи гшост ки чун сар занад зи ғайб
او آن گره گشاست که چون سر زند ز غیب
Хоҳад гиреҳи зи кори замину замони кушод
خواهد گره ز کار زمین و زمان گشاد
Меҳмони ёр ӯ буд ва мо туфайл ӯ
مهمان یار او بود و ما طفیل او
Дар бар туфайлӣ аз шарафи миҳмони кушод
در بر طفیلی از شرف میهمان گشاد
Ёрб боҳилли байти набӣ каз дараш марон
یارب باهل بیت نبی کز درش مران
Аҳлӣ ки бар дар карамати чашми ҷони кушод
اهلی که بر در کرمت چشم جان گشاد
Бар перяш бубахш ки рӯзӣ ки зодаам
بر پیریش ببخش که روزی که زادهم
Чашм аз умеди марҳаматат бар ҷаҳони кушод
چشم از امید مرحمتت بر جهان گشاد