Пеши ту аитбиби ҷони бскаҳи з хеш мерӯм
بصبر اگرچه بسی روزها بسر کردم
Ҳол нагуфта аз дарат бодил риш мерӯм
دگر ربودیم از دست تا نظر کردم
Аз ҳамаи кас чу зарраам пеши ту офтоби пас
بیک نظر که بکردم من از پی راحت
Гар бмнти назар буд аз ҳама пеш мерӯм
جراحت جگر خویش تازه تر کردم
Пеши забони муддаӣ чун магасам чаҳ ғам буд
دلم بهجر تو چون آرمیده بود چرا
Ман ки ббоди нӯши ту бар сар неш мерӯм
طپیدن دل آسوده را خبر کردم
Пеши ту офтоб агар зарраи сифати зи ҷои рӯм
دگر درون دلم جای میکنی هرچند
Меҳр ту мекашад марои ман на бхўиш мерӯм
ز رشک یاری غیرت ز دل بدر کردم
Ишқ батон шуд аз азали кеши ман аихдои параст
چو مرغ نامه بر از شوق دیدنش اهلی
Айб чаҳ мекунӣ маро каз пай кеш мерӯм
هزار بار من از خویشتن سفر کردم