Олимиро ту ба шухии дилу ҷони сӯхта Эй

هان ای خضر که آب بقا نوش کرده‌ای

эй писари ин ҳамаи шухии з ки омӯхта Эй

یاران تشنه را چه فراموش کرده‌ای

Бо дили зори маро боз бисӯзӣ бачаи ранг

گوش رضا به حال محبان نمی‌نهی

Ки чу гули чеҳра ба сад ранг бар афрӯхта Эй

گویا ز دشمنان سخنی گوش کرده‌ای

Чашми ман чун нигарад бе ту ҷамоли дгарон

چون صاف عیش مردم هشیار داده

Ки аз он сӯзани мижгони назарами дӯхта Эй

مارا ز درد هجر چه مدهوش کرده‌ای

Ҳамаи офоқи харидор ту зонанд ки ту

گر ناله‌ای کند دل بدخو ز جور تو

Юсуфи худ ба зари носараи бФрўхтаҳ Эй

او را گناه نیست، تو بدخوش کرده‌ای

Ошиқи сӯхта парвона шуд эй булбули маст

اهلی چو دور شاه علاء الدین محمد است

Ту чу сӯсан ба забони ошиқи дили сӯхта Эй

این جام سرخوشی ز کجا نوش کرده‌ای