Баҳақи шоми висолу бъҳди рӯзи нахуст

بحق شام وصال و بعهد روز نخست

Ки рӯзу шаби дили ман дар ҳавои суҳбати тест

که روز و شب دل من در هوای صحبت تست

Фидои нози ту аисрў нозанинон анд

فدای ناز تو ایسرو نازنینان اند

Ки хуштар аз ту дарин боғ срўноз нараст

که خوش تر از تو درین باغ سروناز نرست

На раҳм дод сипеҳр ва на раҳматии ҳаргиз

نه رحم داد سپهر و نه رحمتی هرگز

Турои зи сахти дилӣу марои зи толеъи суст

ترا ز سخت دلی و مرا ز طالع سست

Чаҳ лутф буд ки соқӣ бхоксорон кард

چه لطف بود که ساقی بخاکساران کرد

Ки сад ғубори ғам аз дил ба ним ҷуръа бишуст

که صد غبار غم از دل به نیم جرعه بشست

Агарчӣ захми дарун ба шавад бмрҳми ишқ

اگرچه زخم درون به شود بمرهم عشق

Хушо касе ки дили каси нахусти ҳам зи нахуст

خوشا کسی که دل کس نخست هم ز نخست

Дил аз шикастаи худ брмкн ки рост дил аст

دل از شکسته خود برمکن که راست دل است

Баҳақи шоҳ ки аҳлии шикастаи исти дуруст

بحق شاه که اهلی شکسته ایست درست