Як бӯсаи ҳаргизами лаби симини барии надод
یک بوسه هرگزم لب سیمین بری نداد
Ҳаргизи ниҳоли ошиқии мо барии надод
هرگز نهال عاشقی ما بری نداد
Модари хумори ҳасрату парвонаи гарми васл
مادر خمار حسرت و پروانه گرم وصل
Давлати бъошқони ту болу парии надод
دولت بعاشقان تو بال و پری نداد
Ҳар соғарам ки дод фалак гарчи заҳр буд
هر ساغرم که داد فلک گرچه زهر بود
То хӯн накард дар дили ман дайгарии надод
تا خون نکرد در دل من دیگری نداد
Заҳр аз кафи ту ҳамчу шукр мехӯрам ки бахт
زهر از کف تو همچو شکر میخورم که بخت
Ҳаргиз ба тӯтӣӣ ба азин шукрии надод
هرگز به طوطیی به ازین شکری نداد
Аз хушк ватар чаҳ пеши ту орм ки толеъам
از خشک و تر چه پیش تو آرم که طالعم
Ғайр аз даҳони хушкӣу чашмтарӣ надод
غیر از دهان خشکی و چشم تری نداد
Ҷузи ҳасрат аз назораи Юсуфи зи ҷон чаҳ суд
جز حسرت از نظاره یوسف ز جان چه سود
Моро ки бахт чун ҳамаи симу зарии надод
مارا که بخت چون همه سیم و زری نداد
Аҳлӣ ки масти васл батон буд оқибат
اهلی که مست وصل بتان بود عاقبت
Мард аз хумори ҳиҷру касаши соғарии надод
مرد از خمار هجر و کسش ساغری نداد