Шукри худо ки чашми ту бар мо фитод боз
گل من مگو که لب را بکسی گشاد هرگز
Дасти дуои мо дар давлати кушоди боз
که به گلشن وصالش نوزید باد هرگز
Гӯйии бабрад аз дили мо ҳар ғамӣ ки буд
من ازین دو چشم غلطان چه مراد نقش بندم
Лутфати бики ҷавоби саломӣ ки дод боз
که ز ششدر امیدم نبود گشاد هرگز
Чашмати баҳоли мо назар марҳамат фиканд
نه که شادی وصالم ندهد زمانه و بس
Ва он ишваҳо ки дошт биксўи ниҳоди боз
که بهرچه دل نهادم دگرم نداد هرگز
Тошди зиёдаи меҳри ту эй офтоби ҳасан
مگرت بیاد آرم غم خود ز ناله ورنه
Шуд сӯзи ошиқонаи мроҳми зиёди боз
ز غرور خوبی از کس نکنی تو یاد هرگز
Баси ноМуродӣӣ ки кашид аз хумори ҳиҷр
دل عاشقان ز خوبان همه شاد باد یارب
Аҳлӣ ки шуд зи васли ту масти муроди боз
دل اهلی از تو بی غم نفسی مباد هرگز