То ғарқи баҳр хӯн нашӯй аз ҷафои кас

نظر بنرگس او کن ز خشم و ناز مپرس

Бегонаи шӯи зи халқ ва машав ошнои кас

ز گریه حال دلم بین ز ناله باز مپرس

Ганҷи ниҳони ишқи бкси фош чун кунам

به بین زبانه آتش ز چاک سینه من

Ман бар худ эътимод надорам чаҳ ҷои кас

خبر زدود دل و آه جانگداز مپرس

Он лаб карам кашад тамаъ бӯса нестам

حدیث بلبل بیدل که چون جگر خونست

Дар шаръи ишқи каси надиҳади хунбҳоии кас

ز لاله پرس چو پرسی ز سرو ناز مپرس

Кӯии турои сафо на ки аз оби чашми мост

بیار باده مپرس از تطاول زلفش

Бар каъба миннатӣ набӯд аз сафои кас

شب است کوته ازین قصه دراز مپرس

Ҷузи ман ки ҷон чу шамъи даҳум аз барои ту

هزار نکته سربسته زان دهان داریم

Худро накуштааст касе аз барои кас

ولی حکایت پنهان ز اهل راز مپرس

Он лиззатӣ ки ёфт зи дашноми ту дилам

دلم سجود بتان گر کند مجازی نیست

То зинда ам наёфтаам аз дуои кас

تو در حقیقت دل بین و از مجاز مپرس

Аҳлӣ агар ҳавоӣ адам кард гӯ бирав

اگر حدیث تو پرسد چه عیب اهلی را

Наниҳодааст ишқи ту бандии бпои кас

کسی نگفت بمحمود کز ایاز مپرس