Ифтихори ҷаҳони ҳмидолдин

افتخار جهان حمیدالدین

Ки хиради мадҳи ту ҳаме хонд

که خرد مدح تو همی خواند

Донкаҳ аз ҳеҷ рӯй натавон гуфт

دانکه از هیچ روی نتوان گفت

Ки надонад ҳамеу натавонад

که نداند همی و نتواند

Монад як чизи онкӣ худ накунад

ماند یک چیز آنکه خود نکند

Гарчи ҳоле тавонад ва донад

گرچه حالی تواند و داند

Зонка бар бениёз воҷиб нест

زانکه بر بی‌نیاز واجب نیست

Каз паии нафъи кас қазо ронад

کز پی نفع کس قضا راند

Лам дар афъол ӯ наёяд аз он

لم در افعال او نیاید از آن

Ки сабаб дар миёна бинишонад

که سبب در میانه بنشاند

Ғании мутлақ аз ғараз давраст

غنی مطلق از غرض دورست

Феъл ӯ кӣ ба феъл мо монад

فعل او کی به فعل ما ماند

Ҳеҷ тадбир нест ҷузи таслим

هیچ تدبیر نیست جز تسلیم

Хештан беш аз ин наранҷоанд

خویشتن بیش از این نرنجاند