Сяти ҷамол рӯй ту олами ФрўгрФт

صیت جمال روی تو عالم فروگرفت

Ҳасанат ҷаҳон гирифту бўҷаҳ накӯ гирифт

حسنت جهان گرفت و بوجه نکو گرفت

Зоҳид ки манъи ошиқ девона ме намӯд

زاهد که منع عاشق دیوانه می نمود

Рӯят чу дид оташи ишқаш дарав гирифт

رویت چو دید آتش عشقش درو گرفت

Бе пардаи тоби ҳасану ҷамолаш касе надошт

بی پرده تاب حسن و جمالش کسی نداشت

Зон рӯи ниқоби моӣии моро бирав гирифт

زان رو نقاب مائی ما را برو گرفت

Ғулмону ҳурро баназар кӣ даровард

غلمان و حور را بنظر کی درآورد

Ҳар дил ки бо ҷамоли рухи ёр ху гирифт

هر دل که با جمال رخ یار خو گرفت

( чун вояи дилами ҳамаи дами шоҳид ва май аст

(چون وایه دلم همه دم شاهد و می است

Аз тавбаи дасти шастаму ҷом ва сабу гирифт )

از توبه دست شستم و جام و سبو گرفت)

( то аз ниқоби зулф ҷамолаш намӯд рӯ

(تا از نقاب زلف جمالش نمود رو

Савдои зулф ӯ ҳамаи ҷон мўбмў гирифт )

سودای زلف او همه جان موبمو گرفت)

( гӯйанд аз чаҳ ҷони асирӣ мушаввашаст )

(گویند از چه جان اسیری مشوش است)

( ошуфтагии зи зулфи парешон ӯ гирифт )

(آشفتگی ز زلف پریشان او گرفت)