Ало эй сар ба ғифлат дар ниҳода

الا ای سر به غفلت در نهاده

Ба дунёи дайни худ бар бод дода

به دنیا دین خود بر باد داده

Ки гуфтат доварӣ кун бо фалаки ту ?

که گفتت داوری کن با فلک تو‌؟

Ҷигар хӯн кун зи муштӣ бе намаки ту ?

جگر خون کن ز مشتی بی‌نمک تو‌؟

Турои андӯҳи нону ҷома то кӣ ?

ترا اندوه نان و جامه تا کی‌؟

Туро аз ному нанги омма то кӣ ?

ترا از نام و ننگ عامه تا کی‌؟

зи бас ки андеша беҳуда кардӣ

ز بس که‌اندیشهٔ بیهوده کردی

Ниҳоди хешро фарсӯда кардӣ

نهاد خویش را فرسوده کردی

Ниҳоди хеш қурбон кун ба таслим

نهاد خویش قربان کن به تسلیم

Ба пеши ин сухан биншин ба таълим

به پیش این سخن بنشین به تعلیم

зи сар дар абҷади маънии дромўз

ز سر در ابجد معنی درآموز

зи нури шаръи шамъ дил барафрӯз

ز نور شرع شمع دل برافروز

Бисӯзон ним шаби ин сақфи шаби ранг

بسوزان نیم‌شب این سقف شب‌رنگ

Буруни пари зини кабӯтари хонаи танг

برون پر زین کبوتر‌خانهٔ تنگ

Гар ояд шарбати ғайбӣ ба ҳалқат

گر آید شربت غیبی به حلقت

Намонад низ ному нанги хилқат

نماند نیز نام و ننگ خلقت

Тўро бо моли дунёи дайн бибояд

تورا با مال دنیا دین بباید

Чунонкат он бибояд ин бибояд

چنانکت آن بباید این بباید

Ту дайни ҷӯии дил аз дунё шудаи маст

تو دین جویی دل از دنیا شده مست

Ндонӣ кин фароҳами надиҳадати даст

ندانی کاین فراهم ندهدت دست

Дили ту дар ду рӯ ӣӣ шуд гирифтор

دل تو در دو‌رو‌یی شد گرفتار

Ту монадӣ зери кӯҳи аҷабу пиндор

تو ماندی زیر کوه عُجب و پندار

Яке рӯят ба дунё кардае ту

یکی رویت به دنیا کرده‌ای تو

Дигар рӯят ба дайн овардае ту

دگر رویت به دین آورده‌ای تو

Ба тарки ин ду рӯ ӣӣ гӯии охир

به ترک این دو‌رو‌یی گوی آخر

Якеро бас буд як рӯй охир

یکی را بس بود یک روی آخر

Дилатро аз ду рӯе шин бошад

دلت را از دو رویی شین باشد

Ки шари аннос зўолўҷҳин бошад

که شر الناس ذوالوجهین باشد