Ҳуққае зар дошт мардӣ бе хабар
حقهای زر داشت مردی بیخبر
Чун бамурд ва зу бимонад он ҳуққаи зар
چون بمرد و زو بماند آن حقه زر
Баъд солӣ дид фарзандаш ба хоб
بعد سالی دید فرزندش به خواب
Сӯраташ чун мӯш ва ду чашмаши пари об
صورتش چون موش و دو چشمش پر آب
Пас дар он мавзе ки зар биниҳода буд
پس در آن موضع که زر بنهاده بود
Мӯшии андари гирди он май гашти зуд
موشی اندر گرد آن میگشت زود
Гуфт фарзандаш казу кардам савол
گفت فرزندش کزو کردم سؤال
Каз чаҳ ӣнҷо омадӣ бар гӯии ҳол
«کز چه این جا آمدی؟ بر گوی حال»
Гуфт зар биниҳодаам ин ҷойгоҳ
گفت: «زر بنهادهام این جایگاه
Ман надонам то бадв кас ёфт роҳ
من ندانم تا بدو کس یافت راه»
Гуфт охири сӯрат мӯшат чарост
گفت: «آخر صورت موشت چراست؟»
Гуфт ҳар дилро ки меҳри зари бхост
گفت: هر دل را که مهر زر بخاست
Сӯраташ инаст ва дар ман май нигар
صورتش اینست و در من مینگر
Панди гир ва зар бияфкан эй писар
پند گیر و زر بیفکن ای پسر!