Гул гуфт : касами умр ба дарюзаи надод

گل گفت: کسم عمر به دریوزه نداد

Дод дили ман гунбади фирӯзаи надод

دادِ دلِ من گنبدِ فیروزه نداد

Айём агар чаҳ дод сад барги маро

ایام اگر چه داد صد برگ مرا

Чаҳ суд ки барги умри як рӯзаи надод

چه سود که برگِ عمر یک روزه نداد