Мо ба хулд аз сари Кувайт ба тамошо наравем

ما به خلد از سر کویت به تماشا نرویم

Ба тамошо баравадгар ҳамаи кас , мо наравем

به تماشا برود گر همه کس، ما نرویم

То гул рӯй ту , дар шаҳри тмошогаҳи мост

تا گل روی تو، در شهر تماشاگه ماست

Ба тамошои гул аз шаҳр ба саҳро наравем !

به تماشای گل از شهر به صحرا نرویم!

Дӯстон , дӯсти азин марҳала рафт ва , зи пеш

دوستان، دوست ازین مرحله رفت و، ز پیش

Рафт дил ; мо биравем аз пай ӯ ё наравем ? !

رفت دل؛ ما برویم از پی او یا نرویم؟!

Миҳмонем дарин хона ба умеди вафо

میهمانیم درین خانه به امّید وفا

Рӯй дарҳами макаш эй сусти вафо , то наравем

روی درهم مکش ای سست‌وفا، تا نرویم

Равад аз рафтан мо халқӣ аз онҷо ба гузор

رود از رفتن ما خلقی از آنجا به گذار

Биравем аз сари кӯии ту ки танҳо наравем ? !

برویم از سر کوی تو که تنها نرویم؟!

Дили қавии дор ки аз ҷаври ту дар пеши касон

دل قوی دار که از جور تو در پیش کسان

Гарчи гӯйем з рафтани сухан аммо наравем !

گرچه گوییم ز رفتن سخن اما نرویم!

Омадеми озар аз он кӯй ба ранҷиши имрӯз

آمدیم آذر از آن کوی به رنجش امروز

Вале он сабр надорем ки фардо наравем

ولی آن صبر نداریم که فردا نرویم