Зиҳии махмурии олами гулӣ аз ҳасрати ҷомат
زهی مخموری عالم گلی از حسرت جامت
Забонҳо то нигини соғаркаши хамёза ӣ науммат
زبان ها تا نگین ساغرکش خمیازه ی نامت
Ки медонад ҳарифи соғари васлат ки хоҳад шуд
که میداند حریف ساغر وصلت که خواهد شد
Ки мо паймонаи пргрдим аз сари ҷӯши пайғомат
که ما پیمانه پرگردیم از سر جوش پیغامت
Ба тўФонхонаҳ ӣ хуршеди васлати раҳи нмиёбд
به توفانخانهی خورشید وصلت ره نمییابد
з ҳастӣ то гусастан нест , натавон басти эҳромат
ز هستی تا گسستن نیست، نتوان بست احرامت
Кунун каз пардаи рангам ба чандини ҷилваи урёнӣ
کنون کز پردهٔ رنگم به چندین جلوه عریانی
Чаҳ миқдори он қабои ноз танг омад бар андомат
چه مقدار آن قبای ناز تنگ آمد بر اندامت
Ба чашм кам ки мебинад сияҳи рӯзони улфат ро
به چشم کم که میبیند سیهروزان الفت را
Ба сад хуршед менозад саҳари парварда ӣ шомат
به صد خورشید مینازد سحر پرورده ی شامت
Нигаҳро хона ӣ чашмаст занҷири гирифторӣ
نگه را خانه ی چشم است زنجیر گرفتاری
намебошад буруни парвози мо аз ҳалқаи домат
نمیباشد برون پرواز ما از حلقهٔ دامت
Гулоб аз мавҷи талхӣ дар канори ноз май ғлтд
گلاب از موج تلخی در کنار ناز میغلتد
Суханро зеб дигар медиҳад андоз дашномат
سخن را زیب دیگر میدهد انداز دشنامت
Ба тӯфони баҳори нўхтиҳо ғӯта зад охир
به توفان بهار نوخطیها غوطه زد آخر
Ҷаҳони сояи сарви ту то пушти лаби бомат
جهان سایهٔ سرو تو تا پشت لب بامت
Ба фикри чораи савдои мо ёрб ки пардозад
به فکر چارهٔ سودای ما یاربکه پردازد
Ду олами як ҷнўнзорст аз шӯри ду бодомат
دو عالم یک جنونزارست از شور دو بادامت
На азкиФити огоҳии сети ин ваъзат , эй зоҳид
نه ازکیفیت آگاهیست این وعظت، ای زاهد
Ҳамон таълим бе мағзии сети фарёди лаби ҷомат
همان تعلیم بیمغزیست فریاد لب جامت
Нафасро доми роҳати хилват ойӣна ме бошад
نفس را دام راحت خلوت آیینه میباشد
Нагардӣ ғофил аз дил эй ки матлӯбаст оромат
نگردی غافل از دل ای که مطلوب است آرامت
Мизоҷ ҳарза тозат он қадри ваҳшии сет эй ғофил
مزاج هرزه تازت آنقدر وحشیست ای غافل
Ки аз ваҳшати Ромигар худ ҳамон ваҳшат кунад ромат
که از وحشت رمی گر خود همان وحشتکند رامت
Хазоне кард чархи пухтаи кори аҷзои рангат ро
خزانیکرد چرخ پختهکار اجزای رنگت را
Ҳануз умеди сарсабзии сет дар андешаи хомат
هنوز امید سرسبزیست در اندیشهٔ خامت
Чаҳ май пайчии з рӯй ҷаҳл бар тӯли амли бедил
چه میپیچی ز روی جهل بر طول امل بیدل
Ки мӯи ҳў маст чу Ни тори назари оғозу анҷомат
که مو هو م است چو ن تار نظر آغاز و انجامت